नई दिल्ली

जब संपत्ति पर अवैध कब्ज़ा हो जाए तो आपको क्या कानूनी उपाय करने चाहिए 

जब संपत्ति पर अवैध कब्ज़ा हो जाए तो आपको क्या कानूनी उपाय करने चाहिए 

जब संपत्ति पर अवैध कब्ज़ा हो जाए तो आपको क्या कानूनी उपाय करने चाहिए

प्रदीप विधूड़ी नई दिल्ली

संपत्ति पर कब्जा उसके मालिक का होना एक कानूनी अधिकार है।
किसी भी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से उसकी इच्छा के विरुद्ध बेकब्जा नहीं किया जा सकता।
अपराधी चाकू और बंदूकों की नोक पर सीधे सरल सभ्य नागरिको के जमीन मकानों पर कब्ज़ा कर लेते हैं और उन्हें संपत्ति से बेदखल कर देते हैं।
भारतीय कानून में इस समस्या से निपटने हेतु संपूर्ण व्यवस्था दी गई है

आपराधिक कानून आईपीसी की धारा 420

भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 एक सार्वभौमिक प्रसिद्ध धारा है। यह धारा धोखाधड़ी के अनेक मामलों में प्रयोज्य होती है। किसी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से आपराधिक बल के माध्यम से बेदखल करने पर इस धारा को लागू किया जा सकता है। संबंधित पुलिस थाने से इस धारा के अंतर्गत कार्यवाही की जा सकती है। कोई भी पीड़ित व्यक्ति को सर्वप्रथम अपने इस अधिकार का उपयोग करना चाहिए।

आईपीसी की धारा 406

भारतीय दंड संहिता की धारा 406 अमानत में खयानत के मामलों में लागू होती है। इस धारा के अंतर्गत किसी व्यक्ति की संपत्ति में विश्वास के आधार पर घुसकर उस पर कब्जा कर लेगा संगीन अपराध है। पीड़ित पक्षकार अपने साथ हुए अन्याय को लेकर इस धारा के अंतर्गत संबंधित पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत शिकायत दर्ज कर सकता है।

आईपीसी की धारा 467 भारतीय दंड संहिता की धारा 467 कूटरचना पर लागू होती है। यदि किसी संपत्ति को कूट रचित दस्तावेज के माध्यम से हथिया लिया गया है तथा उस पर अपना कब्जा जमा लिया गया है तब पीड़ित पक्षकार ऐसे मामले में इस धारा के अंतर्गत शिकायत कर सकता है।

सिविल कानून

सिविल कानून का नाम सुनकर ही जनता के भीतर एक लंबी कानूनी प्रक्रिया का चित्र सामने आ जाता है। यह बात सच है कि भारत की अदालतों में न्याय की प्रक्रिया अत्यंत विषाद और खर्चीली है जहां कोई भी वंचित व्यक्ति अपने मामले को लेकर जाने के से भयभीत होता है क्योंकि अदालत में जाना समय और धन दोनों का नुकसान करना मालूम होता है पर अनेक मामले ऐसे हैं जिनमें कानून ने शीघ्र और सस्ती राहत उपलब्ध कराई है। उन्हीं मामलों में यह मामला भी आता है जहां किसी व्यक्ति की संपत्ति पर गैरकानूनी कब्जा कर लिया जाता है।

स्पेसिफिक रिलीफ एक्ट,

1963 त्वरित न्याय हेतु भारत की संसद द्वारा बनाया गया यह अधिनियम मील का पत्थर साबित हुआ है। इस अधिनियम की धारा 6 इस समस्या से निपटने का समाधान उपलब्ध करती है जहां किसी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से बेक़ब्ज़ा कर दिया गया है और ऐसा बेकब्जा किसी वैधानिक कार्यवाही के माध्यम से नहीं किया गया है अपितु मनमर्जी से किसी व्यक्ति की संपत्ति में घुसकर उस पर अपना कब्जा जमा लिया गया है। वहां पर धारा 6 लागू होती है, इस धारा के अंतर्गत पीड़ित को सरल संक्षिप्त न्याय दिया जाता है।

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